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Gareebi Shayari

Garibi Janti Hai

Apne Mehmaan Ko Palko Par Bitha Leti Hai,
Gareebi Janti Hai Ghar Me Bichone Kam Hain.

अपने मेहमान को पलकों पे बिठा लेती है,
गरीबी जानती है घर में बिछौने कम हैं।

Greebi Shayari - Gareebi Janti Hai

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Gareebo Ke Bacche

Gareebo Ke Bacche Bhi Khana Kha Ske Tyuharo Me,
Tbhi To Bhagwaan Khud Bik Jate Hai Bazaro Me.

गरीबों के बच्चे भी खाना खा सके त्योहारों में,
तभी तो भगवान खुद बिक जाते हैं बाजारों में।

Gareebi Shayari - Greebo Ke Bacche

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Chheen Leta Hai

Chheen Leta Hai Har Cheez Mujhse Ae Khuda,
Kyaa Tu Mujhse Bhi Jyada Gareeb Hai.

छीन लेता है हर चीज़ मुझसे ऐ खुदा,
क्या तू मुझसे भी ज्यादा गरीब है।

Bahut Jaldi Seekh Leta Hun Jindagi Ka Sabak,
Gareeb Bachcha Hun Baat-Baat Par Jid Nahi Karta.

बहुत जल्दी सीख लेता हूँ जिंदगी का सबक,
गरीब बच्चा हूँ बात-बात पर जिद नहीं करता।

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Garibo Ki Auqaat Na Poocho

गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा है,
इनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा है,
चेहरे कई बेनकाब हो जायेंगे,
ऐसी कोई बात ना पूछो तो अच्छा है।

खिलौना समझ कर खेलते जो रिश्तों से,
उनके निजी जज्बात ना पूछो तो अच्छा है,
बाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनके,
कैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है।

भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हें,
उनके तो हालात ना पूछो तो अच्छा है,
मज़बूरी में जिनकी लाज लगी दांव पर,
क्या लाई सौगात ना पूछो तो अच्छा है।

गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा है,
इनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा है।

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Tehjeeb Ki Misaal

Tehjeeb Ki Misaal Gareebon Ke Ghar Pe Hai,
Dupatta Fata Hua Hai Magar Unke Sar Pe Hai.

तहजीब की मिसाल गरीबों के घर पे है,
दुपट्टा फटा हुआ है मगर उनके सर पे है।

Tahjeeb Ki Misaal - Poverty Shayari

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